प्लास्टिक के विरुद्ध

प्लास्टिक के विरुद्ध

आज के दौर में प्लास्टिक विश्व समुदाय के समक्ष एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है। कुल प्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा हमारे आसपास एकल प्रयोग (सिंगल यूज) प्लास्टिक के रूप में फैला हुआ है। इससे निपटना संभव है, बशर्ते वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक के खिलाफ प्रभावी प्रयास हों। भारत आर्थिक और तकनीकी संपन्न राष्ट्र बनने की दिशा में लगातार प्रगतिशील है। प्लास्टिक उन्मूलन की दिशा में भी क्रांतिकारी कदम उठाकर यह विश्व के लिए प्रेरणा बन सकता है।देश में ऐसे कई शहर हैं, जो प्लास्टिक मुक्त अभियान में हिस्सेदारी कर रहे हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ही ऐसे कई संगठन हैं, जो सरकार और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर यह काम कर रहे हैं। देहरादून में यह काम तीन स्तर पर हो रहा है, सरकारी स्तर पर, सांस्थानिक स्तर पर और नागरिक स्तर पर। सरकारी स्तर पर देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड (डीएससीएल), देहरादून नगर निगम और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसमें प्रमुख भूमिका में नजर आते हैं। डीएससीएल ने पिछले सितंबर में प्लास्टिक वापसी अभियान चलाया, जिससे सरकारी स्कूलों के 5,200 छात्र-छात्राओं को जोड़ा गया। एक महीने तक चले इस अभियान में छात्रों ने अपने घर और आसपास से 555 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया, जिसे बाद में रिसाइकल किया गया। देहरादून नगर निगम अपने विभिन्न कार्यक्रमों में एकल प्रयोग प्लास्टिक मुक्ति को शामिल करने के साथ ही जन जागरूकता अभियान में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। ऐसे ही एक नियामक निकाय के रूप में कार्य करते हुए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि कोई कॉरपोरेट या स्थानीय व्यवसायी पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन न करे।

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भी देहरादून को प्लास्टिक मुक्त बनाने के अभियान में पूरी गंभीरता के साथ संलग्न हैं। आईआईपी ऐसा पहला संस्थान है, जिसके पास प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल कर ईंधन में बदलने की तकनीकी क्षमता है। एक हजार किलो प्लास्टिक कचरे से 800 लीटर डीजल या 700 लीटर पेट्रोल बनाने के संयंत्र के साथ आईआईपी पर्यावरणीय चेतना जागृत करने के मामले में बड़ी भूमिका निभा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और कोका कोला ने देहरादून में पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को होने वाली क्षति कम करने के लिए एक कार्य योजना शुरू की है।

दून घाटी में कुछ कॉरपोरेट संस्थानों द्वारा भी प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया जा रहा है। फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से भी निरंतर खाद्य व्यवसायियों के बीच पर्यावरण संबंधी जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। प्लास्टिक प्रबंधन के क्षेत्र में नागरिक स्तर पर भी विशिष्ट कार्य किया जा रहा है। शहर के कई रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन और नागरिक समूह नियमित रूप से प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य कर रहे हैं। कई नागरिक समूह कूड़े का उसके स्रोत पर ही पृथकीकरण करने, लोगों को कपड़े के बैग वितरित करने और जन जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जैसे काम कर रहे हैं। ये प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक देश को एकल प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प की दिशा में भी उत्साहवर्द्धक संकेत हैं। प्लास्टिक के विरुद्ध ऐसे अभियान देश के दूसरे शहरों में भी हो रहे होंगे। ऐसे प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर हों, तो देश को एकल प्लास्टिक मुक्त बनाना मुश्किल नहीं है।

-लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

Jan 07, 2020 12:37:49 - मे प्रकाशित

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