जनधन योजना के 6 साल: बीस करोड़ वयस्कों के लिए बैंक अब भी बहुत दूर

इसीलिए लाल किले की प्राचीर से 15 अगस्त 2014 को विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाइ) की घोषणा कर 28 अगस्त से संपूर्ण देश में अभियान शुरू कर दिया था जिसके परिणामस्वरूप आज करोड़ों परिवार बैंक सेवाओं से जुड़ गए फिर भी अभी 20 प्रतिशत से अधिक वयस्कों के पास बैंक खाते नहीं हैं और जिन लोगों ने खाते खोले भी हैं उनमें से भी कुछ बंद हो गये और लगभग 19 प्रतिशत खाते निष्कृय हैं।

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मीडिया के समाप्त कर दिए जाने के बाद उसी से उम्मीद के पत्र

इससे भी बड़ा अंतर सेमेस्टर और ऐनुअल एक्जाम सिस्टम के प्राप्तांकों में है । ग्रेडिंग और नन ग्रेडिंग के बीच प्राप्तांकों में तो और ज्यादा अंतर है- उदाहरणस्वरूप बिहार के सभी विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में जहां 65% पर गोल्ड मेडलिस्ट हो जाता है वहीं बनारस हिन्दी विश्वविद्याल (BHU) में एक सामान्य छात्र भी 80% तक अंक पाता है । ऐसे में प्रतियोगिता परीक्षा के जगह “डिग्री-लाओ-नौकरी पाओ” के आधार पर नियुक्ति घोर अन्यायपूर्ण और अवसर की समानता के खिलाफ है, जिससे मेधावी और कुशल छात्र-छात्राओं के पात्रता भी नहीं बच पा रहा है ।

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चीन से हजारों गुणा बेहतर भारत-नेपाल मैत्री संबंध ! 

सन् १९६२ में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतिय कम्युनिष्ट पार्टी ने और उनके काम्रेड लोगों ने चीन के समर्थन में भारत विरोधी नारा दिया था। उदाहर्णाथ काम्रेड स्व.ज्योती बसु...। आज नेपाल में कम्युनिष्ट शासन है। केपी शर्मा ओली कि कम्युनिष्ट सरकार है। चीन कम्युनिष्ट मुल्क होने के कारण प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली कि चीन को ओर झुकाव ज्यादा हो सकता है ! हर- एक फ्रन्ट पर चीन को सपोर्ट करते होगें !

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वेदों में वृक्ष और उनका महत्व !

भारतीय संस्कृति में वृक्ष मानव के लिए स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के प्रमुख घटक के रूप में माने जाते हैं। आयुर्वेद में इनकी विशेषता का उल्लेख मिलता है और इन पौधों के गुण-धर्म के आधार पर इनका औषधि रूप में एवं पर्यावरण के लिए उपयोग किया जाता है। वनस्पतियों का यही गुण-धर्म एवं उनका सदुपयोगिता उन्हें देवत्व का स्थान प्रदान करती है। वृक्षों को देवता के समान मानकर उनकी उपासना, अभ्यर्थना की परम्पराएँ हमारी धरोहर रहीं है।

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कोरोना में जीना सिखो

ग्रामिण हिस्सों में कोरोना तीब्रगति से फैल सकता है इसके भरपुर कारण हैं। ग्रामीण प्रभाग में आज भी प्रत्येक ५ व्यक्ती सैकडौं गाँववाले के संपर्क में आता है। वे व्यक्ती एक गाँव, एक कुटुम्ब, एक समुदाय, एक वर्ग या एक ही बस्ती के हो सकते हैं। वे लोग रोज कि तरह ही एक दुसरे के घर बिनाकारण टाईमपास करने गफ्फ करने एकत्रित होने लगेगें। गाँव के सभी युवक एकत्र होकर क्रीकेट या फिर अन्य खेल खेलेगें। कुछ लोग तो समय बिताने के नाम पर ताश के पत्ते तक खेलते दिखने मिलेगा।

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भारत में 22 करोड़ तो अमरीका मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी 

मीडिया में भी बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं। जो अखबार साधन संपन्न हैं, जिनसे पास अकूत संपत्ति हैं वे सबसे पहले नौकरियां कम करने लगें। सैंकड़ों की संख्या में पत्रकार निकाल दिए गए हैं। न जाने कितनों की सैलरी कम कर दी गई। इतनी कि वे सैलरी के हिसाब से पांच से दस साल पीछे चले गए हैं। प्रिंट के अपने काबिल साथियों की नौकरी जाने की खबरें उदास कर रही हैं।

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चीन कि चील नजर नेपाल के सगरमाथा पर !

चीन सरकार के प्रभुत्व वाले च्यानल CGTN के ट्विट के अनुसार सगरमाथा चीनका भु-भाग बताना विश्वव्यापी बहसका विषय बना हुआ है। सगरमाथा कि उंचाई नापने के बहाने चीन ने नया अभियान शुरुआत कि है या युँ कह सकते हैं नया पैंतरा खेला हुआ है। इस अभियान के अन्तिम चरण में पहुँच कर चीन ने CGTN च्यानल के माध्यम से सगरमाथा के कुछ दुर्लभ फोटो प्रकाशित किया हुआ है।

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मलेरिया की दवा से कोई लाभ नहीं है कोरोना के मरीज़ों को, महामारी के साथ जीना सीखना होगा सबको

अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अप्रैल के शुरू में कहा था कि यह दवा ठीक कर देगी। उस वक्त भी अमरीका के बड़े वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने सवाल उठाए थे। मगर इसी बहाने कुछ दिनों तक चर्चा चल पड़ी। कई देश इस दवा का आयात करने लगे जिनमें से अमरीका भी है। भारत ने निर्यात किया। इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा। ट्रंप की मूर्खता का अंदाज़ा सभी को था लेकिन महामारी ऐसी है कि हर कोई कुछ दिनों तक भरोसा तो करना ही चाहता है।

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कुछ बातें समय के साथ समझ में आती हैं !

महाविद्वान आचार्य चाणक्य का कहना है की दोस्ती/ मित्रता / या उठना बैठना केवल अपने ही स्तर में ही या अपने समकक्ष बराबर वालों में ही करना चाहिए ! वह बराबरी का स्तर चाहे ज्ञान का हो , चाहे यश का हो , चाहे कीर्ति का हो , चाहे धन का हो , चाहे बुद्धि का हो , किसी एक में अवश्य वह आपके समकक्ष होना चाहिए ! वरना आपकी Value और Importance ख़तम हो जाएगी !

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समाचार और संकट : कोरोना वायरस एक खबर

गनीमत है कि कोर्ट ने सरकार की इस बात को नहीं माना और 24 घंटे के भीतर उसे एक ऐसा पोर्टल बनाने को कहा, जिससे लोगों को बीमारी से जुड़ी सारी सूचनाएं और जानकारियां मिल सकें। शहरों से समाज के कमजोर वर्ग के पलायन को लेकर सरकार की चिंता वाजिब है। उसकी यह आशंका भी निराधार नहीं है कि सोशल मीडिया पर आई फर्जी खबरों और अफवाहों ने मजदूरों में घबराहट

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उत्तराखण्ड में कोरोना: बदरीनाथ-केदारनाथ के रावल भी क्वारंंटाइन, यात्रा फिलहाल नहीं

गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट तो 26 तारीख को ही ग्रीष्मकाल के लिए खुल जाएंगे। चूंकि इस यात्रा में देश विदेश के लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और सारा विश्व ही महामारी से जूझ रहा है, इसलिए देश में हालात सामान्य होने से पहले यात्रियों को यहां आने की अनुमति देना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में सरकार बीच का रास्ता निकालते हुए पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार कपाटोद्घाटन का कार्यक्रम तो होने दे रही है, मगर यात्रियों को फिलहाल आने की अनुमति नहीं होगी। कपाटोद्घाटन के लिए भी दोनों धामों के रावलों का मौजूद रहना अनिवार्य है।

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क्या सारी जिम्मेदारी सरकार की है ?

ये क्या समय है राजनीति करने की ? जिस वक्त पूरा विश्व भीगी बिल्ली बना पड़ा है कोरोना को लेकर , उस वक़्त इस देश के घृणित लोगों के चुने हुए घृणित लोग राजनीति कर रहे हैं । क्या मीडिया चैनल को नहीं चाहिए था कि सबसे अपील कर सकारात्मक रूप से सबसे वहीं रहने को कहे ? क्या हम लोगों को नहीं चाहिए था कि सबसे कहें कि जो जहाँ है वह वहीं रहे ?

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