मुस्कुराहट 

- वसन्त लाेहनी

सुबहके मुस्कुराहट में
पूर्वाहुती चेतना बाटती हैं
अनगिनत उषाके स्वरुप मे
लेकिन -
फैले हुवे चेतना पुंज से सब डरते हैं
वह जो रात दिन जन-चेतना बढानेके लिए
जप करते रहते हैं
क्यो?
जप करना एक रस्म हैं
अपने अपने धंधाका
रश्मी तो नही
तो, डरते हैं बढती हुई चेतना से
तब न इन्द्र ने उषाका रथको दो टुकडे करदिया
जब उषा चेतना फैलारहिथी
अपने मुस्कुराहट बाटकर

प्रकाशित तारीख : 2021-03-05 19:32:00

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