।। एक कविता ऐसी हो ।।

।। एक कविता ऐसी हो ।।

मन करता कुछ ऐसा लिखदुं पढ़कर खुश समाज हो।
शान्ति हो क़ायम जिससे क्रान्ति का आगाज़ हो।।
गीत ऐसा लिखना चाहता प्रीत जगाये प्यार की
ऐसी हो कविता जिसमे पीड़ा हो संसार की
लिखु ग़ज़ल गम्भीर जिसमें बातें हो सार की
दोहा मुक्तक छंद सब विधा हर प्रकार की
सारी विधा शामिल जिसमे सबकी एक आवाज़ हो।
मन करता कुछ ऐसा....

ऐसी रचुं रचना कोई प्रेम का संदेश दे
भाईचारा क़ायम करके मिटा बैर द्वेष दे
जो दोषी और अपराधी को सज़ा का आदेश दे
बंधन की दीवार तोड़कर सभी को प्रवेश दे
जिसको सुनकर खुश हो सारे कोई ना नाराज़ हो।
मन करता कुछ ऐसा.....

रचना हो अनोखी खुद में अलग हो अंदाज़ जिसका
पाठक हो प्रशंसक जिसके कायल हो समाज जिसका
शान्ति हो वर्तमान भविष्य हो आगाज़ जिसका
प्रवृति हो तेज़ जिसकी शांत हो मिज़ाज जिसका
"विश्वबंधु" की रचना पर कोई ना ऐतराज़ हो।
मन करता कुछ ऐसा......

Mar 29, 2020 16:09:51 - मे प्रकाशित

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