नेपाल के सुदूरपश्चिम में देश का प्रथम चारलेन सेतु नमुना निर्माणधिन

नेपाल के सुदूरपश्चिम में देश का प्रथम चारलेन सेतु नमुना निर्माणधिन

श्याम भट्ट/नेपाल - प्रवीणसिंह विक/भारत

भारत नेपाल के पश्चिमी सीमावर्ती इलाके के दोनों भी राष्ट्रके गाउँ को जोडने के लिए नेपाल सरकार चारलेन पुल निर्माणधिन करने जा रही है। नेपाल के पन्चेश्वर, पश्चिम सेती, सुख्खा बन्दरगाह, सेती लोकमार्ग के विषय में सदियों से सुनते आ रहे सुदूरपश्चिमेली  स्थानीय लोग भी बुढे हो चुके है। ऐसी जानकारी स्थानीय पत्रकार डीआर पन्तजी ने एक साक्षात्कार में कहा है।

हकिकत में कहा जाये तो कोरोना के इस भयंकर महामारी में भी नेपाल के पश्चिमी सीमा कंचनपुर में भारत नेपाल सीमा को जोडने चारलेन पुल समय में पूरा होगा ऐसा अनुमान लगाना गलत न होगा।

भारत के राजधानी दिल्ली, औद्योगिक क्षेत्र नोएडा और उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थापित औद्योगिक क्षेत्र रुद्रपुर नेपाल के महेन्द्रनगर से नैनिताल जाने के लिए इस निर्माणधिन चारलेन पुल को भारतीय नेशनल हाईवे से जोडा गया है। जिससे नेपाल के पश्चिमी प्रांत कंचनपुर के लोग उत्साहित नजर आ रहे हैं।

लाकडाउन के कारण विगत एक महिने से निर्माण कार्य सुस्त तरिके से चल रहा है। अपितु कोरोना कार्यकाल में ५० प्रवासी मजदुर इसी क्षेत्र में क्वारेन्टाइन होते हुए भी इस निर्माण में तकनिकी यन्त्र सहित काम करते हुए दिख रहे हैं ।

महाकाली नदी पर बन रही इस योजना को वि.सं. २०७४ साल भदौ महिना में भुमिपुजन करते हुए ३ अरब २७ करोड में नया महत्वाकांक्षी पुल बनाने का संकल्प नेपाल सरकार ने लिया हुआ है। इस चारलेन पुल में दोनों भी तरफ से ट्राफिक संचालन करने जैसा पुर्वाधार डिजाइन तैयार किया हुआ नेपाल का पहिला नमुना पुल बनने जा रहा है। "प्रिस्ट्रेस्ड आरसीसी ग्रीडर" आधुनिक प्रविधि में बन रहे यह चारलेन पुल नेपाल का पहिला नमुना पुल होगा। इस निर्माणधिन पुल के एक लाईन में १७ पिल्लर और दोनों भी लाईन में ३४ पिल्लर इसीप्रकार ३ मीटर खाली जगह है। ५० मीटर के बाद पुल को एक अलग पिल्लर से मजबुती के लिये जोड दिया हुआ नक्शा में प्रमाणित किया हुआ है।

पुल के दोनों भी लाईन के बिचोबीच के ३ मिटर खाली जगह को नापने पर पुल कि कुल चौडाई २७ दशमलव ८ मिटर और लम्बाई ८०० सौ मिटर है। इस पुल कि विशेषताऐं इस पुल में नेपाल के अन्य पुल और राजमार्ग से भी टिकाउ और केमिकल युक्त गोलाकार सरिया दाऐंबाऐं उपयोग में लाया हुआ है। ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी  निर्माणधिन पुल के ईन्जिनियर सुलभ नेउपाने ने एक साक्षात्कार में बिएल हिंदी सेवा को बताया है।

उक्त निर्माणधिन पुल कुमार – सिएफईसी कम्पनी ज्वाइन्ट वेन्चर में नेपाली वि.स. २०७८ के अन्त तक पूरा करने का संकल्प कर नेपाल सरकार ने जिम्मेवारी सहित टेन्डर पास किया हुआ है। ऐसी जानकारी सामने आयी है। कुमार – सिएफईसी कम्पनी के ईन्जिनियर किशोरराज पांडे के अनुसार इस पुल के ३४ में से २८ पिल्लर तैयार हो चुके हैं। इस पुलको एक पिल्लर से दुसरे पिल्लर तक जोडने के लिये ५ पिल्लर के स्ल्याब में ढलान का काम पूरा हो चुका है। प्रत्येक पिल्लर से दुसरे पिल्लर कि औसतन दुरी ५० मीटर है। मानसून के पहिले ही बाकी रहे हुए ६ पिल्लर बनाने का लक्ष्य बनाया हुआ है। समयअवधी में पुल का निर्माण कार्य पुर्ण करने के लिये अक्टोबर से काम पुनः पुरे जोर से शुरु करना होगा ऐसा कहना ईन्जिनियर पांडे का है।

महाकाली शारदा ब्यारेज में बनी हुई पुरानी पुल ईष्ट ईन्डिया कम्पनी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्र शमशेर के समय भारतनेपाल आवागमन के लिये बनायी हुई थी। किन्तु आज भारत सरकार अपने समयानुकुल प्रातः काल, दोपहर और सांझ तीनपहर कुछ मर्यादित समय के लिये खोलती है। जिससे भारत नेपाल आवागमन, व्यापार पर बहुत असर पडते हुये दिख रहा है। भारत नेपाल सीमांत का गड्डाचौकी नाका हमेशा एक किनारे पडे हुये दिखायी देती है। सन् १९२८ में बने इसी पुल के ढाई किलोमीटर दक्षिण में नेपाल ने चारलेन पुल निर्माण करने कि नींव रखी है। इसी निर्माणधिन पुल के दो किलोमीटर दुरी पर ही एशिया में दुसरे नम्बर पर आनेवाला Bar Sunction  (झुल्ङ्गे) पुल दोधारा चाँदनी अपने में मनमोहक रमणीय पर्यटन क्षेत्र पर्यटको के आने का मुख्य केन्द्र बना हुआ है।

राष्ट्रघाती विवादित महाकाली सन्धि में जलविद्युत परियोजना बनाने के लिये भारत ने भारत नेपाल महाकाली संधि में टनकपुर से कंचनपुर तक पक्की सडक बनाकर मालवाहक गाडी आने में सुविधा देना का वादा खिलाफी करते हुये नेपाल का बडा भु–भाग कब्जा करके टनकपुर बनवासा ब्यारेज बनाया। आज भी ब्यारेज से टनकपुर बाजार १० किलोमीटर उत्तर के उंचाई में स्थित है।

टनकपुर बाजार सुदुरपश्चिमेली का सबसे पुराना व्यापारिक केन्द्र है। दोनों भी देश के हित में महाकाली संधि अनुसार भारत सरकार को ब्रह्मदेव तक पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को जोडते हुए भी आज दसगज क्षेत्र में मटैना से ब्यारेज तक २ किलोमीटर पक्की सडक निर्माण करने में रुचि नहीं बराबर दिखती है।

इस चारलेन पुन निर्माण सहित ही टनकपुर ब्यारेज और गड्डाचौकी के पुराने पुलका मरम्मत कर भिमदत्त नगरपालिका और कालीपार महाकाली नगरपालिका जोडने का और एक अभुतपुर्व अकल्पनीय परियोजना सुख्खा बन्दरगाह बनाने का सपना नेपाल सरकार और स्थानीय नेता लोगों में दिखा रहे हैं।

May 22, 2020 21:28:18 - मे प्रकाशित

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