मंगल ग्रह में क्यों जाना चाहते हैं हम

मंगल ग्रह में क्यों जाना चाहते हैं हम

अंतरिक्ष कार्य का विकास और अंतरिक्ष की खोज देश की व्यापक क्षमता दिखाती है। सभी लोग इसका महत्व समझते हैं। स्पेस एक्स के सीईओ एलोन मस्क ने दावा किया था कि वे एक करोड़ लोगों को मंगल ग्रह में पहुंचाएंगे। कई देशों ने इस जुलाई में मार्स रोवर छोड़ने की योजना की घोषणा भी की। 23 जुलाई की दोपहर 12 बजकर 41 मिनट पर चीन का पहला मार्स रोवर थ्येनवन नंबर-1 सफलता से लांच हुआ। योजनानुसार अगले सात महीनों में थ्येनवन नंबर-1 की उड़ान जारी रहेगी और अंततः मंगल ग्रह में पहुंचेगा। इसका लक्ष्य मंगल ग्रह की परिक्रमा, मंगल ग्रह में लैंडिंग और गश्त का मिशन पूरा करना है।

यह आवश्यक है कि इन सात महीनों में पूरी दुनिया के विज्ञान प्रेमी चीन के इस मार्स रोवर पर नजर रखेंगे। अगर मिशन सफल होता है, तो चीन दुनिया में पहला देश बन जाएगा, जो मंगल ग्रह के पहले अन्वेषण में ही सॉफ्ट लैंडिंग पूरा कर पाएगा।

आंकड़ों के अनुसार अब तक मंगल ग्रह के अन्वेषण की सफलता दर करीब 42 प्रतिशत है। मानव जाति के इतिहास में अमेरिका, सोवियत संघ, जापान, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारत ने डिटेक्टर को मंगल ग्रह के कक्षा में पहुंचाया था। वहीं अमेरिका और सोवियत संघ ने मंगल ग्रह में सॉफ्ट लैंडिंग की। अब तक सिर्फ अमेरिका ने मंगल ग्रह में सैर कर निरीक्षण किया।

Jul 31, 2020 13:05:12 - मे प्रकाशित

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