साहित्य

“साक्षात्कार- राजीव कुमार झा की कथाकार ममता शर्मा से बातचीत”

  • Jun 23, 2020

नासिक, महाराष्ट्र मेरी जन्मस्थली है। नासिक की स्मृतियां मेरे पास नहीं है। पिता फ़ौज में थे और देवलाली में पोस्टेड थे। उनकी बदली हुई और हम रांची आ गए। पढ़ाई लिखाई रांची में हुई। मेरे लिए लेखन हमेशा घर लौटने जैसा होता है। कुछ ऐसा कि आप घूमते रहें घर से बाहर; कभी यहां, कभी वहां, कभी सुबह निकल कर शाम को लौटें, क

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गजल में नारी मन की नैसर्गिक अभिव्यक्ति...

  • Jun 17, 2020

राजीव कुमार झा कवयित्री कुसुम चौधरी के गजल संग्रह 'मेरे खत' में संग्रहित उनकी गजलों में नारी मन का नैसर्गिक प्रेमभाव जीवन की अनेक रंगतों को लेकर प्रकट होता है। गजल काव्य की सबसे खूबसूरत  मानी जाती है और ये बात इस संग्रह की गजलो को पढते हुए और भी बखूबी समझी जा सकती है।

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क्या सवर्ण जातियों के लोग गरीब नहीं हो सकते?

  • May 31, 2020

जिस देश का संविधान धर्म निरपेक्ष होने का दावां करता है , उसी देश में धर्म और जाति के आधार पर आरक्षण संविधान की वैधता पर एक प्रश्न चिन्ह है। उक्त कथन कुछ लोगों को दलित विरोधी लग सकता है लेकिन एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र में आरक्षण का बस एक ही आधार होना चाहिए और वह है आर्थिक। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी क्या जाति औ

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आओ कसम उठाऐं

  • May 19, 2020

आओ कसम उठाऐं हम ऐसी अलख जगाने की। प्रेम भावना भरकर दिल में नफरत दूर भगाने की।। गौर से सोचो और समझो ये सृष्टि गई रचाई क्यों ईश्वर के मन में सुन्दर अद्दभुत सोच ये आई क्यों उन्होने सोचा होगा अकेले जाये खुशी मनाई क्यों ऐसा लक्ष्य दुनिया अब तक कर न हासिल पाई क्यों आओ कोशिश करें सभी ह

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आंसुओं की लड़ी

  • May 05, 2020

इस घड़ी हमारे हाथ होती यदि किसी परी की छड़ी घुमा के व्वो देता पिछवाड़े तुम्हारे कि सारी मक्कारी तुम्हारी रह जाती धरी की धरी! पर, क्या कीजे पन्नों में कैद परी भी इस घड़ी रोये जा रही है धार धार और ये जो दिख रही है इन दिनों नदियों की निर्मलता आर पार

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।। एक कविता ऐसी हो ।।

  • Mar 30, 2020

मन करता कुछ ऐसा लिखदुं पढ़कर खुश समाज हो। शान्ति हो क़ायम जिससे क्रान्ति का आगाज़ हो।। गीत ऐसा लिखना चाहता प्रीत जगाये प्यार की ऐसी हो कविता जिसमे पीड़ा हो संसार की लिखु ग़ज़ल गम्भीर जिसमें बातें हो सार की दोहा मुक्तक छंद सब विधा हर प्रकार की सारी विधा शामिल जिसमे सबकी एक आवाज़ हो

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रिमाल की २० रुबाइयां

  • Mar 26, 2020

तू तू मैं मैं बिला वास्ता होती तो है कभी नहीं दुश्मनी की शुरूआत आप से तो नहीं कहीं ? हाँ है तो उससे जाके माफ़ी फ़ौरन माँगिए ताकि हों पहले जैसे ताल्लुकात सभी सही । मेरी मुश्किल की घडी आज है बेजवाब लौट रही आवाज है फरियाद करुँ तो किस से करुँ ! मेरा खुदा मुझ से नाराज है ।

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।। मैं निर्धन की झोपड़ी हूँ ।।

  • Mar 16, 2020

मैं निर्धन की झोपड़ी मेरा दर्द सुनाने आई हूँ। चौटिल घायल जख्मी अपना जिस्म दिखाने आई हूँ।। होकर अड़िंग खड़ी रहती हूँ आंधी और तुफानों में कुदरत कहर ढ़हाती मुझपर देखके खड़ी मैदानों में मेरे सहास के चर्चे चलते रहते सदा धनवानों में मुझमें है वो हिम्मत जो ना मिल पाये मकानों में मत मुझसे

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नाग्रीजुली में असम नेपाली साहित्य सभा की शिलाप्रतिक उदघाटन

  • Mar 13, 2020

असम नेपाली साहित्य सभा बाक्सा जिला समिति की सौजन्य से अौर हरिभक्त साहित्य संस्कृति समिति नाग्रीजुली की सहयोग से कवि गोपाल खड़का स्मृति कविगोष्ठी अौर असम नेपाली साहित्य सभा की शिलाप्रतिक उदघाटन अनुष्ठान बाक्सा जिले के तामुलपुर महकमा अंतर्गत भारत-भूटान सीमावर्ती नाग्रीजुली में अनुष्ठित हुइ. कार्यसुची के मुताविक सुबह 9

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